झुण्ड में रहने वाली सहेली

जौनपुर

 22-09-2018 01:42 PM
पंछीयाँ

छोटी मिनीवेट (Small Minivet) पक्षी की प्रजातियां भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिणपूर्व एशिया में वितरित पाईं जाती हैं। यह अधिकतर झुण्ड बना कर रहती है जिनमें एक-दो नर, बाकी मादाएं हुआ करती हैं। इसीलिए लोगों ने इनका एक नाम ‘सहेली’ और दूसरा नाम ‘सातसखी’ रखा है। यह पक्षी 15 से 16 से.मी. लम्बी और 6 से 12 ग्राम वज़नी होता है। सहेली हमारे शीतकाल के अतिथि पक्षियों में से एक है जो अधिकतर सर्दियों में देखने को मिलती है। यह पक्षी जौनपुर तथा पूरे भारत में पाई जाती है।

नर की आधी पीठ का उपरी हिस्सा और गले तक का निचला हिस्सा काला, डैनों को छोड़कर बदन का बाकी हिस्सा चटक लाल और डैने काले रंग के होते हैं। मादा का रूप आधिकांशत: नर जैसा ही होता है, सिवाय इसके कि नर के बदन पर का लाल स्थल मादा में पीले रंग का हो जाता है।

इन छोटी पक्षियों की प्रजातियों में मध्यम वन निर्भरता है। वे आमतौर पर 0 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाते हैं। यह पक्षी कृषि भूमि और ग्रामीण उद्यान में रहना पसंद करता है। इस छोटे पक्षी के आहार मुख्य रूप से कीड़े होते हैं। कीड़े, कीट और कीटडिंभ, कैटरपिलर, बीटल, झींगुर और टिड्डे उनके प्राथमिक भोजन हैं। वे पेड़ों और शलभाष से कीट शिकार करते हैं। यह अपना घोसला छोटी टहनियों और पत्तियों की मदद से वृक्ष की शाखाओं में या घनी झाड़ियों में बनाते हैं। यह अपने अंडे घोसले में ही छोड़ते हैं और 14 दिनों में अंडे से बच्चे निकलते हैं।

ये पक्षी अप्रवासी हैं, वे प्रजनन के बाद स्थानीय रूप से फैलते हैं। यह पक्षी सर्दियों के दौरान निम्न स्तर की तरफ बढ़ते हैं। प्रजनन के बाद, वे किशोर सीमा के भीतर नए स्थानों में फैल सकते हैं और स्थापित हो सकते हैं। अपनी सीमा के भीतर, वे भोजन और प्रजनन के लिए स्थानीय संचलन कर सकते हैं।

सहेली की भी एक छोटी उपजाति है – राजलाल। इसके शारीर का आधिकांश हिस्सा मटमैले रंग का होता है, सिर्फ छाती पर एक लाल धारी होती है, पूंछ और डैनों से ज्यादा, पर लाल होते हैं। मादा की ठोड़ी काली होती है और पैर कुछ जर्द रंग के होते हैं। यह झुण्ड बाँध कर रहती हैं और अपने सौन्दर्य पर इतराती फिरती हैं। कहीं जमकर नहीं बैठती। आज यहाँ कल वहां, आज इस बाग़ में, कल उस बाग़ में। यही इसका किस्सा है और यही इसकी प्रणाली है।

संदर्भ:
1. सिंह, राजेश्वर प्रसाद नारायण. 1958. भारत के पक्षी. प्रकाशन विभाग, सूचना एवं प्रकाशन मंत्रालय
2. अंग्रेज़ी पुस्तक: Kothari & Chhapgar. 2005. Treasures of Indian Wildlife. Oxford University Press
3. https://indianbirds.thedynamicnature.com/2018/02/small-minivet-pericrocotus-cinnamomeus.html



RECENT POST

  • सबसे विचित्र मिट्टी के पात्रों में से एक हैं, जोमोन (Jomon) काल में बनाये गये मिट्टी के पात्र
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     29-11-2020 08:13 PM


  • ट्री शेपिंग (Tree Shaping) कला के माध्यम से उगाये जा रहे हैं पेड़ों से फर्नीचर (Furniture)
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     28-11-2020 09:10 AM


  • इत्र में सुगंध से भरपूर गुलाब का सुगंधित पुनरुत्थान
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     27-11-2020 10:14 AM


  • रोम और भारत के बीच व्यापारिक सम्बंधों को चिन्हित करती है, पोम्पेई लक्ष्मी की हाथीदांत मूर्ति
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     26-11-2020 09:54 AM


  • कहाँ खो गए तलवार निगलने वाले कलाकार?
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     25-11-2020 10:39 AM


  • बौद्ध धर्म के ग्रंथों में मिलता है पृथ्वी के अंतिम दिनों का रहस्य
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     24-11-2020 09:02 AM


  • भक्तों की आस्था के साथ पर्यटन का मुख्य केंद्र भी है, त्रिलोचन महादेव मंदिर
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     23-11-2020 08:48 AM


  • ब्रह्मांड के सबसे गहन सवालों का उत्तर ढूंढ़ने के लिए बनाया गया है, लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     22-11-2020 10:52 AM


  • जौनपुर में ईस्‍लामी शिक्षा का इतिहास
    ध्वनि 2- भाषायें

     21-11-2020 08:33 AM


  • क्यों भारत 1951 शरणार्थी सम्मेलन का हिस्सा नहीं है?
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     20-11-2020 09:29 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id