कैसे सार्वजनिक कार्य हेतु लेती है सरकार ज़मीनें

जौनपुर

 09-09-2018 12:47 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

जब भी शहर और कस्बों के सड़क मार्ग, सीवर और बिजली लाइनों, संचार, और अन्य प्रणालियों में सुधार और विस्तार होता है तो अक्सर सरकार द्वारा निजी भूमी का अधिग्रहण किया जाता है। इसलिए सर्वोपरि अधिग्रहण-अधिकार की शक्ति सरकार को सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए निजी भूमि लेने की अनुमति देती है, यदि सरकार संपत्ति के मालिक को उचित मुआवजा प्रदान कराती है। आइये इसको गहराई से समझते हैं।

भारत में सर्वोपरि अधिग्रहण-अधिकार संविधान मूल रूप से अनुच्छेद 19 और 31 के तहत संपत्ति के अधिकार के लिए प्रदान किया गया है। वहीं अनुच्छेद 19 सभी नागरिकों को "संपत्ति के अधिग्रहण, अधिकार और बेचने का अधिकार" देती है। और अनुच्छेद 31 में बताया है कि "कानून के अधिकार से कोई भी व्यक्ति अपनी संपत्ति से वंचित नहीं होगा"। यह भी बताया गया है कि मुआवजे का भुगतान उस व्यक्ति को किया जाएगा जिसकी संपत्ति सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए अधिग्रहण की गयी है। क्या आपको पता है कि संपत्ति के अधिकार से संबंधित प्रावधान कई बार बदले जा चुके हैं।

पहले सरकार द्वारा संपत्ति का उचित मुआवजा दिया जाता था, परन्तु अब यदि संपत्ति मालिक सरकार के मूल्यांकन पर विवाद करता है और वे कीमत पर सहमत नहीं होते हैं तो यह मामला मनमानी कार्यवाही का हो जाता है। मनमानी कार्यवाही के दौरान संपत्ति मालिक संपत्ति के लिए अपना मूल्यांकन प्रदान करता है। आमतौर पर संपत्ति के मालिक को एक वकील और मूल्यांकन के साथ ही सभी प्रक्रिया करनी चाहिये।

संपत्ति के मुल्यांकन के दौरान ये बात हमेशा याद रखनी चहिये कि संपत्ति का बजारी मुल्य क्या है। संपत्ति मूल्यांकन में विचार किए जाने वाले कारकों में शामिल हैं : इसका आकार; यह कहाँ पर स्थित है; इसके आस पास किस तरह की इमारतें, सड़कें, व्यवसाय, वर्तमान में इसका क्या उपयोग किया जा रहा है, और आने वाले समय में इसका उपयोग किसके लिए किया जा सकता है, यह कितना सुलभ है, और क्या उस संपत्ति में किरायेदार या अन्य लीजधारक शामिल हैं। इन सबके ज्ञान के बात संपत्ति का मालिक अपनी आजीविका का प्रतिनिधित्व कर सकता है। ताकि जो संपत्ति में निवेश किया गया है वह सब उपयुक्त मुल्य में मिल सकें।

एक बात जो ध्यान रखने योग्य है कि अगर सरकार द्वारा संपत्ति अधिग्रहण करने में देरी की जाती है तो इसका मतलब है की अब सरकार द्वारा संपत्ति का मुल्य काफी कम किया जा सकता है। जिससे संपत्ति के मालिक को काफी नुकसान हो जाता है। आप सभी ध्यान रखें की यदि आपको अपनी संपत्ति का मुल्यांकन कम लग रहा हो या सरकार द्वारा मनमानी के आधार पर सीमा से ज्यादा संपत्ति ले रहे हैं, तो एक अनुभवी वकील या मुल्यांकन की सहायता लें, जो आपको कानून के आधार पर प्रभावी निर्णय लेने में मदद कर सकें।

संदर्भ :-

1. https://en.wikipedia.org/wiki/Eminent_domain#India
2. https://realestate.findlaw.com/land-use-laws/how-the-government-takes-property.html



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