नटराज की प्रतिमा में ब्रह्मांड उत्पत्ति का राज़

जौनपुर

 04-09-2018 02:45 PM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

भारत में हमेशा से ही संस्कृति, धर्म, परंपरा और साहित्य में विज्ञान से जुड़े कई तथ्य शामिल रहे हैं। हालांकि ये भी सही है कि इनको हमेशा से ही विज्ञान से ज्यादा धार्मिक भावनाओं से जोड़ा गया है, इसलिये हम अपनी गौरवमय संस्कृति को जाने बिना ही बड़े हो गए हैं। हाल के वर्षों में आपने काफी सुना होगा कि भौतिक वैज्ञानिक ब्रह्मांड उत्पत्ति के बारे में जानने के लिये निरंतर प्रयास कर रहे हैं और वे काफी हद तक सफल भी हुए हैं।

अलबर्ट आइंस्टीन के द्रव्यमान ऊर्जा संबंध या द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता (E=mc2) के सिद्धान्त को भौतिकी के क्षेत्र में बेहतरीन खोजों में से एक माना जाता है। इस सिद्धान्त के माध्यम से ही हम आज ब्रह्मांड उत्पत्ति के बारे में जान पाए हैं। परंतु क्या आपको पता है कि भारत में अलबर्ट आइंस्टीन के जन्म से 2800 वर्ष पहले ही द्रव्यमान ऊर्जा संबंध का ज्ञान अस्तित्व में आ गया था।

आइंस्टीन के द्रव्यमान ऊर्जा संबंध और नटराज के ब्रह्मांडीय नृत्य के बीच एक अतुल्यनिय समानता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव के नटराज मुद्रा की प्रतिमा असल में ब्रह्मा के लिये उनके द्वारा किए गए सृजन और संहार के ब्रह्मांडीय नृत्य को दर्शाता है। यह ब्रह्मांडीय नृत्य ब्रह्मांड के निर्माण को समझाने वाले दो सिद्धान्तों बिग बैंग सिद्धान्त (ब्रह्मांड का जन्म एक महाविस्फोट के परिणामस्वरूप हुआ था।) और द्रव्यमान ऊर्जा संबंध की एक स्पष्ट तस्वीर देता है।

एक तमिल अवधारणा के अनुसार शिव को सबसे पहले प्रसिद्ध चोल कांस्य और चिदंबरम की मूर्तियों में नटराज के रूप में चित्रित किया गया था। भगवान शिव के ऊपरी दाहिने हाथ में छोटे डमरू की ध्वनि निर्माण या उत्पत्ति का प्रतीक है और बाएं हाथ में अग्नि विनाश की प्रतीक है। फ्रीद्जऑफ कापरा (प्रसिद्ध ऑस्ट्रियाई भौतिक वैज्ञानिक) के अनुसार भगवान शिव का यह ब्रह्मांडीय नृत्य वास्तव में भौतिक शास्त्रियों द्वारा खोजे जाने वाले उप-परमाण्विक तत्वों के नृत्य को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि आधुनिक भौतिकी में प्रत्येक उप-परमाण्विक न केवल ऊर्जा नृत्य करता है बल्कि इनमें ऊर्जा का प्रवाह भी होता है अर्थात ऊर्जा एक से दूसरे में परिवर्तित हो जाती है, यह निर्माण और विनाश की एक स्पंदन प्रक्रिया है। यही प्रक्रिया शिव के ब्रह्मांडीय नृत्य में भी होती है, इसमें ऊर्जा का निरंतर प्रवाह होता रहता है, जो सृजन और विनाश के रूप में निरंतर परिवर्तित होती रहती है।

नटराज का एक एक अंश प्रतीकात्मक रूप से कुछ न कुछ शिक्षा प्रदान करता है। तो आइये समझें नटराज के भिन्न हिस्सों को इन 9 बिन्दुओं के ज़रिये विस्तार से:

1. उनकी मूर्ति अग्नि-ज्वालाओं से घिरी दिखाई जाती है जिनका तात्पर्य शिव की अनन्त चेतना से है जो विश्व के रूप में व्यक्त हो रही है।


2. शिव को चार भुजाओं के साथ दिखाया जाता है। ये चार भुजाएँ उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम - इन चार दिशाओं की प्रतीक हैं। प्रत्येक भुजा विशेष और पृथक् मुद्रा में है।


3. ऊपर का दाँया हाथ डमरू धारण किये हुए है। प्रतीकात्मक दृष्टि से इस डमरू की ध्वनि सृष्टि के समय होने वाली ब्रह्माण्डीय लय को सूचित करती है।


4. ऊपर का बाँया हाथ ज्वाला धारण किये हुए है जो विनाश को संबोधित करता है। ऊपरी हाथों में विरोधी अवधारणाएं सृजन और विनाश की प्रतिकृति दिखाती हैं।


5. नीचे का दाँया हाथ अभय मुद्रा में है जो बताता है कि व्यक्ति को लगातार अपने आसपास हो रहे परिवर्तन से घबराना नहीं चाहिए।


6. नीचे का बाँया हाथ बायें पैर की ओर इशारा कर रहा है जो कि रमणीयता के साथ कुछ ऊपर उठा हुआ है और उत्कर्ष एवं मोक्ष का प्रतिनिधि है।


7. नटराज के सिर पर एक मुण्ड है जो मृत्यु के ऊपर शिव की विजय का प्रतीक है। उनकी तीसरी आँख सर्वज्ञता, अंतर्दृष्टि और बोध की प्रतीक है।


8. यह संपूर्ण आकृति एक कमलाकृति पीठ पर रखी हुई है जो विश्व की क्रियात्मक शक्तियों का प्रतीक है। नटराज की संपूर्ण मनोदशा स्वभाव से विरोधाभासी है - आंतरिक गहन शांति और बाहरी सशक्त गतिविधियों से संपन्न।


9. शिव की संयमी मुख मुद्रा उनकी निष्पक्षता दर्शाती है जो अतीव संतुलन की स्थिति है। उनका मुकुट नटराज की सर्वोच्चता को द्योतित करता है।


ब्रह्मांडीय नृत्य का यह रूप इस प्रकार भारतीय पौराणिक कथाओं, धार्मिक कला और आधुनिक भौतिकी को जोड़ता है। यही कारण है कि, यूरोप की परमाणु अनुसंधान प्रयोगशाला CERN में भगवान शिव के रूप नटराज की प्रतिमा रखी गयी है। भारत सरकार ने यह 2 फीट की प्रतिमा को CERN के साथ अपने लंबे अनुसंधान सहयोग संबंध का जश्न मनाने के लिए भेंट की थी।

संदर्भ:
1.https://mysteriesexplored.wordpress.com/2011/08/21/einsteins-mass-energy-equivalence-and-the-creation-of-universe-the-big-bang-theory-all-in-one-2800-years-before-einstein-and-modern-science/
2.http://www.fritjofcapra.net/shivas-cosmic-dance-at-cern/
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Big_Bang



RECENT POST

  • पिता का अर्थ है संघर्ष और त्याग का समन्वय
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     16-06-2019 10:30 AM


  • आयुर्वेद का पंचकर्म – शरीर शुद्धिकरण की प्रक्रिया
    व्यवहारिक

     15-06-2019 10:51 AM


  • छोटे और सीमांत किसानों की समस्याओं को समझाती 2017 की एक पुस्तक
    ध्वनि 2- भाषायें

     14-06-2019 10:55 AM


  • जौनपुर का ऐतिहासिक ‘जौनपुर क्लब था पहले इंग्लिश क्लब’
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     13-06-2019 10:35 AM


  • भारत की कुछ मुख्य पारंपरिक चित्रकला शैलियाँ
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     12-06-2019 11:55 AM


  • इस्‍लाम धर्म में दरी का महत्‍व तथा जौनपुर के मस्जिदों की दरियाँ
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     11-06-2019 11:43 AM


  • गर्मी के मौसम में कौन-सी सब्ज़ियाँ हैं स्वास्थ्यवर्धक?
    साग-सब्जियाँ

     10-06-2019 12:00 PM


  • भारत के विचित्र और रहस्यमयी शिव मंदिर
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     09-06-2019 10:15 AM


  • भारत की लोकप्रिय पत्रिका चंदामामा का सफर
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     08-06-2019 11:30 AM


  • अकबर बीरबल की रोचक कथा- हाथी के पदचिन्‍ह का संरक्षण
    ध्वनि 2- भाषायें

     07-06-2019 10:40 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.