बौद्ध कांथा कढ़ाई और जापानी कढ़ाई साशिको के मध्‍य संबंध

जौनपुर

 31-08-2018 03:09 PM
स्पर्शः रचना व कपड़े

भारत के अधिकांश वस्त्रों में विभिन्न प्रकार की कलात्मकता देखी जाती है। भारतीय कारीगरों द्वारा कई आकर्षक कढ़ाईयाँ की जाती हैं, जिनमें से एक हैकांथा कढ़ाई, जो की भारतीय कढ़ाई का काफी पुराना रूप है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों द्वारा खुद को ढंकने के लिये विभिन्न प्रकार के पैच से कपड़े बनाये गये, जहांसेकांथाकढ़ाई कीउत्पत्ति हुयी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की यहकांथा कढ़ाईजापान की सशिको(सशिको शब्द का शाब्दिक अर्थ है ‘छोटे स्टैब्स’)के समरूप है।

18वीं शताब्दी में जापान में सशिको की उत्पत्ति हुई थी, इस बात की पुख्ती हम जापानी संग्रहालयों में 19वीं सदी के सशिको संग्रह से कर सकते हैं।सशिको और कांथा दोनों का उपयोग साधारण आदमी के पुराने कपड़ों को सुरक्षित रखने के लिये किया जाता है। इनमें पुराने कपड़ों के अच्छे भागोंको काटकर नए वस्त्रों और रजाइयों में पैचवर्क के काम के लिये उपयोग किया जाता है।

इन दोनों के बीच में कुछ ज्यादाअंतर नहीं है, बस कांथामें रुपरेखा को भरने के लिए निरंतर सिलाई का उपयोग किया जाता है, जबकि सशिको में मुख्य रूप से रूपरेखा डिजाइन करने के लिए जियोमेट्रिक पैटर्न्स का इस्तेमाल किया जाता है।इनकी समानताओं के विषय में तो हम जान चुकें है, अब सशिको और कांथा कढ़ाई के चरणों पर एक नज़र डालतें हैं।

परंपरागत रूप से सशिको की नीले कपड़ों में सफेद धागे से सिलाई की जाती है। सिलाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सुई (2 इंच के करीब) विशेष रुप से मोटे धागों के लिये बनाई जाती है। जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया था कि इसमें इस्तेमाल होने वाले पैटर्न ज्यादातर जियोमेट्रिक(Geometric) डिजाइन के दोहराए हुए पैटर्न्स होते हैं। और अब रही सबसे महत्वपुर्ण बात कि सशिको कढ़ाई की सिलाई कैसे करते हैं :-

चरण 1 : पहले कपड़े को अच्छे से धो लें, अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो सिलाई और डाई पुरी होने के बाद जब आप इसे धोयेंगे तो कपड़ा सिकुड़ जाएगा।
चरण 2 : अब एक डिजाइन चुनें। एक साधारण डिजाइन फ्रीहैंड(Free hand) बनाएं या किसी बच्चे की ड्राइंग बुक से कॉपी करें।
चरण 3 : डिजाइन की सिलाई के लिए एक अच्छा और कुशल पैटर्न तय करें। यह एक महत्वपूर्ण चरण है, क्योंकि जितना संभव हो सके निरंतर सिलाई के द्वारा इसे बनाएं।
चरण 4 : अब आप सशिको सिलाई को शुरू कर सकते हैं। अब आपने निरंतरन करने वाली सिलाई भी करना सीख लिया है। वहीं कन्था कढ़ाई को ज्यादतर निरंतर सिलाई के द्वारा किया जाता है, इस सिलाई का एक फायदा यह है कि यह सिलाई आगे और पीछे समान दिखती है।

इन कढ़ाईयों के बीच की समानताओं को लोगों के समक्ष पेश करने के लिये जापान में एक प्रदर्शन में, कांथा कढ़ाई के लगभग 70 टुकड़े इवातेते लोक वस्त्र संग्रहालय के संग्रह से लाये जाते हैं और वहीं सशिको के 60 टुकड़े जापान लोक शिल्प संग्रहालय संग्रह से पेश किये जाते हैं।जो लोगों को इन कढ़ाईयों की एतिहासिकता से अवगत कराते हैं तथा साथ ही इनकी उपयोगिता भी बताते हैं।

संदर्भ :-

1.https://en.wikipedia.org/wiki/Sashiko_stitching
2.https://sewguide.com/learn-sashiko-hand-embroidery/
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Kantha
4.http://www.mingeikan.or.jp/english/exhibition/english_201409.pdf



RECENT POST

  • इस्लाम और रमज़ान का एक महत्वपूर्ण पहलू : निय्याह
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     12-04-2021 10:00 AM


  • गोल्डन सिटी ऑफ़ राजस्थान (Golden City of Rajasthan) की एक सैर
    मरुस्थल

     11-04-2021 10:00 AM


  • शर्की सल्तनत और खलीफत
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     10-04-2021 10:16 AM


  • मनुष्यों और अन्य जीवों के शरीर में अंग पुनर्जनन की क्षमता में भिन्नता
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     09-04-2021 10:01 AM


  • लाभदायक के साथ नुकसानदायक भी हो सकती है, अनुबंध खेती
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     08-04-2021 09:45 AM


  • जौनपुर बाजार की खास विशेषता है, जमैथा खरबूज
    साग-सब्जियाँ

     07-04-2021 10:10 AM


  • पर्यावरण और मालिकों के लिए काफी लाभदायक है पेड़ों की छोटे पैमाने पर खेती
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     06-04-2021 09:58 AM


  • पक्षी कैसे इतनी मधुर आवाज़ में गाते हैं?
    पंछीयाँ

     05-04-2021 09:49 AM


  • ईस्टर (Easter) पर अंडों का महत्व और प्रतीकवाद
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     04-04-2021 10:00 AM


  • अजीनोमोटो (MSG) स्वादिष्ट अथवा भ्रान्ति!
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     03-04-2021 10:21 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id