कैसे प्रारंभ हुआ विमान के माध्‍यम से पत्र संचार

जौनपुर

 30-08-2018 02:14 PM
संचार एवं संचार यन्त्र

दूरभाष यंत्र के प्रारंभ होने से पहले लोग संचार हेतु पत्रों का उपयोग करते थे, ये डाक घरों के माध्यम से एक स्थान से दुसरे स्थान तक ले जाये जाते थे, इसके लिए सामान्‍यतः वहानों का उपयोग किया जाता था, जिसमें समय की कोई निश्चित सीमा नहीं होती थी। आइये जानते हैं कैसे कम समय में पत्रों को समुद्र पार भेजा गया। क्या आप जानतें हैं कि 1800 के दशक के दौरान, गुब्बारे और ग्लाइडर्स द्वारा पहला फ्लाइंग मेल ले जाया गया था। जिसे जॉन वाइस (1808-1879) द्वारा अपने गुब्बारे “जुपिटर” में लाफायेट से क्रॉफॉर्ड्सविले, इंडियाना, तीस मील की दूरी पर 123 पत्रों और चौबीस परिपत्रों को ले जाया गया था। लेकिन क्या आपको पता है कि विश्‍व का पहला आधिकारिक एयरमेल भारत में उड़ाया गया था।

भारत में सबसे बड़े पैमाने पर आयोजित कुंभ मेला अनेकों ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है, क्योंकि दुनिया की पहली आधिकारिक हवाई सेवा यहीं शुरू हुई थी। 18 फरवरी 1911 में अर्ध कुंभ मेले के दौरान ही फ्रेंच पायलट मोनसियर हेनरी पिक्वेट द्वारा एक नया इतिहास रचा गया। उस समय के लोगों ने विमान को ना कभी देखा और ना कभी उसके बारे में सुना था। इसलिए विमान को उड़ता देखने के लिये कई लोग एकत्रित हुए। हेनरी ने अपने विमान हैवीलैंड एयरक्राफ्ट में इलाहाबाद से नैनी के लिए 6500 पत्रों (जिसमें मोतिलाल नेहरू और किंग जॉर्ज वी और नीदरलैंड की रानी के लिए पत्र भी शामिल थे) को लेकर 10 किलोमीटर का सफर 13 मिनट में पूरा कर इतिहास रचा था।

वहीं कुछ वर्षों बाद 1948 में विशेष एयरमेल डाक टिकट (12 एनास संप्रदाय) को 8 जून 1948 में बॉम्बे से लंदन तक शुरू किया, यह पहली बाहरी हवाई सेवा के लिये जारी किया गया था। एयर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा टिकट में "मालाबार राजकुमारी (विमान)" की तस्वीर छपाइ गयी जिसका इस्तेमाल अभिषेकात्मक हवाई सेवा में किया गया। चूंकि ये टिकट सामान्य डाक प्रयोजनों के लिए नहीं थे, यह केवल पहली उड़ान पर उपयोग के लिये बनाये गए थे। इन टिकटों को 29 मई 1948 से 8 जून 1948 तक बेचा गया, जिसके बाद वापस ले लिए गये और सामान्य डाक टिकटों के रूप में उपयोग नहीं किये गये।

वहीं 9 सितंबर, 1911 को दुनिया की पहली निर्धारित एयरमेल पोस्ट सेवा यूनाइटेड किंगडम में हेन्डन (उत्तरी लंदन) के लंदन उपनगर के बीच हुई थी।

भारत ने प्रौद्योगिकी में एक बड़ी ऊंचाई हासिल की है, यही कारण है कि भारत अपनी पहली आधुनिक उपलब्धियों में से एक की शताब्दी को चिह्नित कर नई दिल्ली में विश्व फिलेटेलिक प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान दुनिया की पहली एयरमेल डिलीवरी उड़ान को फिर से लागू करने वाला है।

संदर्भ :-
1.https://postalmuseum.si.edu/collections/object-spotlight/india-air-mail.html
2.https://en.wikipedia.org/wiki/Airmail
3.https://stampsofindia.com/readroom/b012.html
4.https://timesofindia.indiatimes.com/city/allahabad/Worlds-1st-Air-Mail-started-during-Maha-Kumbh-in-1911/articleshow/18568118.cms
5.https://www.telegraph.co.uk/news/worldnews/asia/india/8303689/India-to-re-enact-worlds-first-airmail-delivery.html



RECENT POST

  • विश्‍व भर में क्‍यों प्रसिद्ध है मोनालीसा?
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     20-07-2019 11:06 AM


  • जौनपुर के जनजीवन के लिए हानिकारक है कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग
    शारीरिक

     19-07-2019 11:27 AM


  • क्या होगा जब सूर्य होगा ख़त्म?
    जलवायु व ऋतु

     18-07-2019 11:54 AM


  • जौनपुर से प्राप्‍त 9वीं शताब्‍दी ईसा पूर्व के मृदभाण्‍ड
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     17-07-2019 01:42 PM


  • क्या भारतीय सांख्य और दर्शन से प्रेरित है पाइथागोरस प्रमेय?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     16-07-2019 02:16 PM


  • कैसे होता है मौसम और ऋतुओं में परिवर्तन?
    जलवायु व ऋतु

     15-07-2019 12:46 PM


  • प्रात: कालीन राग रामकली और उसकी अभिव्यक्ति
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     14-07-2019 09:00 AM


  • जहाँ तर्क की हुई हार, वहाँ अन्धविश्वास का हुआ प्रचार
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     13-07-2019 11:45 AM


  • उत्तरप्रदेश में आदर्श श्रेणी का स्टेशन है जौनपुर जंक्शन
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     12-07-2019 12:58 PM


  • भारतीय पारम्परिक परिधान को चार चांद लगाता है मोगरा
    बागवानी के पौधे (बागान)

     11-07-2019 12:50 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.