वरदान से अभिशाप बनते खनिज

जौनपुर

 03-08-2018 03:24 PM
खनिज

खनिज जैसे सोना, चांदी, लोहा, चूना पत्‍थर आदि का प्रयोग लाखों वर्षों से होता आ रहा है, वर्तमान समय में केवल उद्योग ही नहीं बल्कि कृषि भी खनिजों पर निर्भर हो गयी है। इनके निरंतर खनन से इनकी लागत तो बढ़ी ही है परंतु साथ ही उत्खनन की गहराई, चट्टान तथा खनिजों की धूल के कारण विभिन्न बीमारियां, विशेष रूप से फेफड़ों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्‍पन्‍न हुई हैं। चाहे आप भूमिगत या ऊपर ज़मीन पर खनन कर रहे हों, यदि एक बार खनिजों की धूल फेफड़ों को क्षतिग्रस्त कर देती है तो इसका कोई उपचार नहीं है। यह धूल खदानों में काम करने वाले व्यक्तियों और खानों के आस-पास के जन समुदायों के लिए एक भी एक खतरा बन गयी है।

जौनपुर की मिट्टी चूना पत्थर से समृद्ध है। यह गृहनिर्माण के लिये बहुत अधिक उपयोगी है और यह भारत की विभिन्न स्तरित चट्टानों से उत्खनित होता है। जौनपुर में खनिजों का उत्पादन बहुत कम होता है, मुख्य खनिज को चूना पत्थर और कंकड़ (शुष्क या अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कैल्शियम-कार्बोनेट के साथ कठोर खनिज या अधोभूमि की एक परत) के नाम से जाना जाता है, तथा इसके साथ ही यहां के कुछ इलाकों में एक अन्य खनिज "रेह" भी पाया जाता है।

खनिजों की खदानों में काम करने वाले व्यक्तियों में धूल या ज़हरीले पदार्थ साँस के साथ फेफड़ों तक पहुंच कर इन्हें सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। इनमें न्यूमोकोनियोसिस (Pneumoconiosis), ऐस्बेसटोसिस (Asbestosis) से संबंधित रोग, रासायनिक निमोनिटिस (Pneumonitis), संक्रमण, और कार्बनिक धूल विषाक्त सिंड्रोम (Organic Dust Toxic Syndrome), सिलिकोसिस (Silicosis) आदि रोग शामिल हैं। चूना पत्‍थर में उपस्थित अनेक रासायनिक पदार्थों के कारण कैल्सिकोसिस (Calcicosis) रोग होता है जो फेफड़ों को हानि पहुंचाता है।

चूना पत्थर के खनन के दौरान, सभी को बहुत सावधान रहना चाहिए। हम कई प्रयासों से इस धूल की मात्रा को सीमित करके फेफड़ों की क्षति को कम कर सकते हैं, जैसे खानों में धूल को कम करने के लिए उपकरण लगा कर, खनिकों को सांस लेने के लिये मास्क आदि सामग्री प्रदान करा कर, काटने या ड्रिलिंग से पहले सतह को गीला करके, चूना पत्थर को फैला कर पीस कर, सुरक्षात्मक उपकरण और कपड़े पहन कर आदि।

राष्ट्रीय खनिक स्वास्थ्य संस्थान (NIMH) नागपुर, भारत के खान मंत्रालय के तहत स्थापित एक स्वायत्त संस्थान है। इसका उद्देश्य खनन और खनिज आधारित उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों में व्यावसायिक स्वास्थ्य और व्यावसायिक बीमारियों की रोकथाम और खानों तथा संबद्ध उद्योगों के कार्य, पर्यावरण में स्वास्थ्य संबंधी खतरों का आकलन करके व्यावसायिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा प्रदान करवाना है।

संदर्भ:
1.http://www.ijri.org/article.asp?issn=0971-3026;year=2013;volume=23;issue=4;spage=287;epage=296;aulast=Satija#top
2.https://oem.bmj.com/content/oemed/12/3/206.full.pdf
3.http://en.hesperian.org/hhg/A_Community_Guide_to_Environmental_Health:Illnesses_from_Dust



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