गन्ने से उत्पादित नवीकरणीय ऊर्जा

जौनपुर

 27-07-2018 02:20 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

गोमती नदी पर स्थित जौनपुर एक महत्वपूर्ण जिला है। यहाँ पर कृषि एक प्रमुख व्यवसाय है तथा ज्यादातर लोग कृषि पर ही आश्रित हैं। जौनपुर गंगा के मैदानी भाग पर आता है, तथा यहाँ पर 5 नदियों का संग्रह है, तो यहाँ पर कृषि बड़े पैमाने पर की जाती है और उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है।

जौनपुर में सबसे ज्यादा उत्पादित फसल यदि देखी जाए तो यह आलू और गन्ना है। गन्ना एक ऐसी फसल है जो कि कम देख-रेख के बावजूद भी बड़ा उत्पादक है। गन्ने से गुड़, शक्कर, सिरका आदि तो बनता ही है परन्तु इससे बायोइथेनोल भी बनाया जाता है, जिसको आगामी नवीकरणीय ऊर्जा के संसाधन के रूप में जाना जाता है।

आइये अब जानते हैं कि इससे ऊर्जा कैसे बनायी जाती है? हाल ही में दुनिया भर ने इथेनोल पर अपनी नजर रखनी शुरू की क्यूंकि यह पेट्रोलियम उत्पादों के लिए एक अच्छा विकल्प है। यह एक प्रकार की ऊर्जा का स्रोत है जो कि ग्रीनहाउस गैसों (Greenhouse Gases) के उत्सर्जन को काम करता है।

इथेनोल या बायोइथेनोल बनाने की प्रक्रिया गन्ने के काटने के बाद से शुरू होती है, जब इसे पानी में मिलाया जाता है। इससे निकले 10-15 प्रतिशत के पदार्थ एक रस पैदा करते हैं, जो है सुक्रोज़ (Sucrose)। रस में कई आवांछनीय कार्बनिक यौगिक भी पाए जाते हैं जो कि उल्टा चीनी (sugar inversion) के रूप में जाने जाते हैं। चीनी के विचलन को रोकने हेतु इसे स्पष्टीकरण की ओर ले जाया जाता है। इस पड़ाव में इसे 115 डिग्री सेल्सियस तक गरम किया जाता है और चूने और गंधक के तेजाब (Sulphuric Acid) से इसका इलाज किया जाता है।

इथेनोल उत्पादन का अगला कदम है किण्वन, जहाँ पर रस को गुड़ के साथ मिश्रित किया जाता है जिससे 10-20 प्रतिशत सुक्रोस प्राप्त किया जा सके। किण्वन की प्रक्रिया गर्म है इसलिए शीतलन की आवश्यकता पड़ती है। इसमें खमीर को बढ़ाने के लिए खमीर पोषक तत्वों को जोड़ा जाता है। इसी प्रकार से चीनी के उत्पादन के साथ ही बायोइथेनोल का भी उत्पादन किया जाता है।

इथेनोल की ऊर्जा भविष्य में एक प्रमुख स्रोत उभर कर सामने आ सकती है। विश्व स्तर पर ब्राज़ील एक उदाहरण है जो बायोइनेथाल के निर्माण और प्रयोग में आगे है। वर्तमान काल में ऊर्जा के स्रोतों का जिस प्रकार से दोहन किया जा रहा है, उससे यही लगता है कि वैकल्पिक ऊर्जा का साधन तैयार करके रखना ज़रूरी है, जिससे अधिक उर्जा क्षरण को रोका जा सके।

संदर्भ:
1. https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0301421510007093
2. https://www.e-education.psu.edu/egee439/node/647



RECENT POST

  • जनसँख्या वृद्धि नियंत्रण में महिलाओं का योगदान
    व्यवहारिक

     26-06-2019 12:19 PM


  • हाथीदांत पर प्रतिबंध लगने के बाद हुई ऊँट की हड्डी लोकप्रिय, परन्तु अब ऊँट भी लुप्तप्राय
    स्तनधारी

     25-06-2019 11:10 AM


  • भारतीय डाक और भारतीय स्टेट बैंक में नौकरी पाने के लिए युवाओं ने क्यों लगाई है होड़?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     24-06-2019 12:02 PM


  • अन्तराष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट में भारतीयों ने जड़े हैं पांच दोहरे शतक
    हथियार व खिलौने

     23-06-2019 09:00 AM


  • भारत के पांच अद्भुत जंतर मंतर में से एक है हमारे जौनपुर के पास
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     22-06-2019 11:27 AM


  • प्राणायाम और पतंजलि योग के 8 चरण
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     21-06-2019 10:16 AM


  • जौनपुर के पुल पर आधारित किपलिंग की कविता ‘अकबर का पुल’
    ध्वनि 2- भाषायें

     20-06-2019 11:15 AM


  • डेनिम जींस का इतिहास एवं भारत से इसका सम्बन्ध
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     19-06-2019 11:02 AM


  • क्या हैं नैनो प्रौद्योगिकी वस्त्र?
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     18-06-2019 11:02 AM


  • क्या प्रवासी पक्षी रात में भी भरते हैं उड़ान?
    पंछीयाँ

     17-06-2019 11:49 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.