एलोवेरा से प्राकृतिक औषधियाँ

जौनपुर

 20-07-2018 02:15 PM
पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

विश्‍व पटल पर कृषि के क्षेत्र में भारत का अग्रणी स्‍थान है तथा इसकी अर्थव्‍यवस्‍था का एक बहुत बड़ा हिस्‍सा कृषि पर निर्भर करता है, जिसमें उत्‍तर भारत प्रमुख है। आज भारत सरकार भी विभिन्‍न उपायों के माध्‍यम से अपनी कृषि को पारम्‍परिक खेती से आधुनिक कृषि की ओर लाने का हर संभव प्रयास कर रही है जिसमें बागवानी एक अच्‍छा माध्‍यम है। साथ ही भारत सरकार द्वारा खाद्य प्रसंस्‍करण को अपनाकर उत्‍पादित फसलों का कुशलता से प्रयोग किया जा रहा है।

भारत की कृषि का एक बड़ा हिस्‍सा उत्‍तर प्रदेश से आता है जिसमें हम जानेंगें गोमती बेसिन के जौनपुर नगर के विषय में जो वास्‍तव में कृषि की दृष्टि से अत्‍यंत समृद्ध शहर है यहां विभिन्‍न प्रकार की फसलों जैसे सब्‍जी उत्‍पादन, औषधिय पौधों का उत्‍पादन तथा फलों के उत्‍पादन को बढ़वा दिया जा रहा है। जौनपुर नगर आयुष भारत मिशन का हिस्‍सा बनाया गया है। यहां दोमट मिट्टी तथा लोमी मिट्टी के प्रकार के साथ जलोढ़ और रेतीले मिट्टी भी पायी जाती है। यह मिट्टी एलोवेरा के विकास के लिए आदर्श है।

आधुनिकता की इस दौड़ में खाद्य पदार्थों में मिलावट एक आम बात हो गयी है जो विभिन्‍न प्रकार की अपरिचित बिमारियों को जन्‍म दे रही है इसलिए अब लोग अपनी आधुनिक औषधियों की तुलना में प्राकृतिक औषधियों में ज्‍यादा विश्‍वास दिखा रहे हैं यही कारण है कि वर्तमान समय में औषधिय पौधों को बढ़वा दिया जा रहा है, यह हमारी प्राचीन संकृति को पुनः जन्‍म दे रही है तथा महर्षि चरक, सुश्रुत और वागभट्ट जैसे ऋषि मुनियों द्वारा हजारों वर्ष पूर्व इन पौधों पर किये गये शोधों को पुनः जीवित कर रही है।

प्राकृतिक औषधियों में रामबाण एलोवेरा :
एलोवेरा यानि घृतकुमारी एक चमत्कारी औषधि है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ एलोवेरा को प्रकृति की सबसे प्रभावशाली और बहुमुखी जड़ी बूटी मानते हैं। एलोवेरा एंटीबायोटिक, एंटी-माइक्रोबियल, कीटाणुनाशक, एंटीसेप्टिक, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल है जिसके अनेक स्वास्थ्य संबंधी लाभ हैं। एलोवेरा ना केवल सामान्य बिमारियों को जड़ से मिटा देता है बल्कि घातक बीमारियों का भी जम कर सामना करता है। एलोवेरा का उपयोग विभिन्‍न बीमारियों जैसे त्वचा संबंधित रोग, मुहांसों से छुटकारा पाने के लिए, बालों की समस्याएं, मसूड़ों की समस्याएं, कब्ज, सूजन और दर्द, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल आदि के उपचार के लिये किया जाता है। साथ ही साथ इसका उपयोग वजन घटाने तथा प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त करने में, पाचन क्रिया में, जख्म या घाव को भरने में भी किया जाता है।

संदर्भ:

1. https://www.medicalnewstoday.com/articles/265800.php
2. http://jaunpur.kvk4.in/district-profile.html
3. Botanischer Bilderatlas printed in Stuttgart (Germany)-1884



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