पूर्वी और पश्चिमी दर्शन शास्त्र में अंतर

जौनपुर

 23-06-2018 03:18 PM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

पूर्व-पश्चिम ऐसी दो संस्कृतियां हैं, जो एक दूसरे से भिन्न हैं। यह भिन्नता हमें इनके दर्शन में भी साफ देखने को मिलती है। इन विपरीत संस्कृति के दर्शन में हमें इनके क्षेत्रों की आबोहवा और सोचने की क्षमता व इनका प्रभाव देखने को मिलता है।

पश्चिमी दर्शन में, हम पूरी तरह से एक सम्पूर्ण हिस्से के महत्त्व पर जोर देना पसंद करते हैं, किसी विषय को पूरी तरह से समझने के बजाए उसके एक हिस्से को अच्छे से जानना बेहतर है। हम दिमाग और शरीर को अलग-अलग पहचान के साथ दो अलग-अलग हिस्सों के रूप में देखते हैं। यह मानसिकता दैनिक अमेरिकी समाज में पाई जा सकती है, चाहे वह राजनीति, धर्म या सम्बंधों की दौड़ हो।

इसके विपरीत पूर्वी दर्शन, सम्पूर्ण पर जोर देता है। यही कारण है कि चीनी और भारतीय ऋषि, धर्म और दर्शन के बीच कभी अंतर नहीं करते थे और न ही अपने दर्शन को शाखाओं में वर्गीकृत किया करते थे। उनकी सभी शिक्षाओं का अर्थ अलग-अलग सत्य के रूप में नहीं होता था, लेकिन ऐसे हिस्सों के रूप में जो अंततः एक सत्य के रहस्य से पर्दा उठाने का संचालन करेंगे।

पूर्वी दुनिया के दृष्टिकोण का सार एकता और सभी चीजों और घटनाओं के पारस्परिक अंतर-संबंध के बारे में जागरूकता है। सभी चीजें एक परमपूर्ण स्वतंत्र और अविभाज्य भागों के रूप में देखी जाती हैं अर्थात वही परम वास्तविकता की विभिन्न अभिव्यक्तियों के रूप में देखी जाती है।

पश्चिम में भगवान है, लेकिन अपने धर्मानुसार आप एक निश्चित तरीके से भगवान की पूजा करते हैं और अपने जीवन को निश्चित तरीके से जीते हैं। पूर्वी दर्शन सम्पूर्ण की बजाए एक भाग पर ध्यान केन्द्रित करता है। वे एक ऐसी दुनिया के पीछे मौलिक और अविभाज्य वास्तविकता का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो हमेशा बदल रही है।

इसके विपरीत पूर्वी परम्पराएं धर्म और दर्शन के आंतरिक पहलुओं पर अधिक ध्यान केन्द्रित करती हैं और वे भागों के बजाए सम्पूर्ण पर ध्यान केन्द्रित करती हैं। यह उस आलौकिक भगवान के लिए कुछ कठोर दायित्वों के बारे में ज़्यादा परवाह नहीं करते हैं, लेकिन वे भौतिक संसार को पार करने के महत्व पर जोर देते हैं अर्थात् मोक्ष की चाह रखते हैं।

हम जान पा रहे हैं कि पूर्व और पश्चिम लंबे समय से परस्पर साथ चलने की कोशिश कर रहे हैं। जिस कारण पश्चिम का पूर्व पर एक बड़ा प्रभाव पड़ा है। इसमें यातायात एक मुख्य माध्यम रहा है। भारत ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश राज द्वारा ब्रिटिश साम्राज्यवाद की पूर्ण शक्ति महसूस की।

धन की गति से अर्थव्यवस्था बढ़ती है। दर्शनशास्त्र विचारों की गति पर चलता है, जो कुछ हद तक धीमा है। पिछले 150 वर्षों में, पश्चिमी दर्शन ने पूर्व पर एक बड़ा प्रभाव डाला है। जबकि इसके विपरीत पश्चिम पर पूर्व द्वारा डाला गया प्रभाव अभी भी नवजात है।

संदर्भ

1. https://www.quora.com/What-are-the-major-differences-between-Eastern-and-Western-philosophies
2. https://blog.oup.com/2015/05/eastern-western-philosophy-tradition/



RECENT POST

  • शिकार के अभाव में मानव भक्षी बनता तेंदुआ
    स्तनधारी

     19-10-2019 11:47 AM


  • क्यों होता है समुद्री पानी नमकीन
    समुद्र

     18-10-2019 10:51 AM


  • जौनपुर का त्रिलोचन महादेव मंदिर है शिव भक्ति का केंद्र
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     17-10-2019 10:42 AM


  • खाद्य सुरक्षा और कृषि सहकारी का आपस में संबंध
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     16-10-2019 12:31 PM


  • अधिकतर अनुष्ठानों में उपयोग किये जाते हैं खील, बताशे, और खिलौने
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     15-10-2019 12:29 PM


  • खरोष्ठी लिपि का इतिहास
    ध्वनि 2- भाषायें

     14-10-2019 02:43 PM


  • महर्षि वाल्मीकि से जुड़े रोचक तथ्य
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     13-10-2019 10:00 AM


  • भारत के सबसे लोकप्रिय और मनभावक रेल मार्ग
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     12-10-2019 10:00 AM


  • औषधीय और स्वादिष्ट गुणों से भरपूर कागज़ी नींबू
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     11-10-2019 10:41 AM


  • क्या है विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     10-10-2019 12:35 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.