विदेशी (यूरूपीय) लेखों में जौनपुर का ज़िक्र

जौनपुर

 11-06-2018 01:00 PM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

जौनपुर अपनी स्थापना के काल से ही एक महत्वपूर्ण शहर के रूप में उभरा था। इसके बारे में भारतीय ही नहीं बल्कि विदेशी लेखकों ने अपनी लेखनी में लिखा। जौनपुर की पराकाष्ठा दूर-दूर तक फैली हुयी थी तथा यही कारण है कि यहाँ पर विभिन्न सूफी संत आये और उन्होंने जौनपुर की गरिमा पर चार चाँद लगाये। जौनपुर धर्म के अलावा शिक्षा के केंद्र के रूप में भी निखर कर सामने आया था तथा यहाँ पर कई ग्रन्थ उस काल में लिखे गए थे। जैनियों की कुछ प्राचीनतम पांडुलिपियाँ उनमें से हैं। इस्फ़हानी ने सबसे प्राचीनतम इस्लामी एटलस का निर्माण जौनपुर से ही किया था। 18वीं शताब्दी के आगमन के साथ जौनपुर में यूरोपीय लोगों का आना प्रारंभ हो गया था जिसको हम विभिन्न पुस्तकों और लेखों में देख सकते हैं।

मुग़ल सल्तनत पर आधारित एक 17वीं शताब्दी की पुस्तक में जौनपुर का जिक्र हमें देखने को मिलता है। मिशनरी रजिस्टर वॉल्यूम 32 में जौनपुर के बारे में हमें विषद जानकारी देखने को मिलती है। ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द चर्च मिशनरी सोसाइटी फॉर अफ्रीका एंड द ईस्ट’ जो कि 1830 में छपी थी में जौनपुर में इसाई धर्म के प्रचार की जानकारी हमें प्राप्त होती है। इसी काल में जौनपुर में डेनियल आया था तथा उसने जौनपुर की प्रमुख इमारतों का चित्र बनाया था जो कि आज लन्दन में सुरक्षित हैं। उन्हीं में से एक चित्र को ऊपर दर्शाया गया है जिसमें डेनियल द्वारा शाही किले की बनाई तस्वीर को दिखाया है। जौनपुर के शाही पुल के बारे में रडयार्ड किपलिंग ने एक 16 लाइन की कविता लिखी है जो कि शाही पुल और जौनपुर की महत्ता को प्रदर्शित करती है। इनके अलावा कई अन्य यूरोपीय पुस्तकों में जौनपुर का जिक्र हमें देखने को मिलता है।

ये सारी पुस्तकें घुमक्कड़ो और विभिन्न लेखकों द्वारा लिखी गयी हैं। जौनपुर के बारे में यूरोपीय विद्वानों ने बड़े पैमाने पर लिखा है जिसका एक मात्र कारण है यहाँ की महत्ता, चाहे वो धार्मिक हो, अध्यात्मिक को, वास्तुकला हो या फिर व्यापर। जौनपुर हर प्रकार से एक उत्तम शहर के रूप में उभर कर सामने आया था। अकबरी पुल का विवरण हमें ‘ट्रांसपोर्ट एंड कम्युनिकेशन इन इंडिया प्रायर टू स्टीम लोकोमोशन’ में देखने को मिलता है और यह भी कि किस प्रकार से जौनपुर में जल मार्ग से व्यापार किया जाता था।

1.https://books.google.co.in/books?id=NcwoAAAAYAAJ&pg=PA324&lpg=PA324&dq=Reference+of+jaunpore+in+european+books&source=bl&ots=hJAP0rVfPx&sig=9zLwbTmUU2ZWmPZtlm4GHW2lgCo&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiWhpq2kbXbAhWGsI8KHVY8AKgQ6AEIXzAH#v=onepage&q=Reference%20of%20jaunpore%20in%20european%20books&f=false
2.https://books.google.co.in/books?id=TCoPAAAAIAAJ&pg=PA42&lpg=PA42&dq=Reference+of+jaunpore+in+european+books&source=bl&ots=exMOD0m7uH&sig=gYRR_gxH6FQceQIAUpmNc-D1Es4&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiWhpq2kbXbAhWGsI8KHVY8AKgQ6AEIYTAI#v=onepage&q=Reference%20of%20jaunpore%20in%20european%20books&f=false
3.https://books.google.co.in/books?id=lIcoAAAAYAAJ&pg=RA2-PA42&dq=Reference+of+jaunpore+in+european+books&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjch-HDkbXbAhXMrY8KHeFoDCcQ6AEIKjAA#v=onepage&q=Reference%20of%20jaunpore%20in%20european%20books&f=false
4.https://books.google.co.in/books?id=f1vJRjCl8HkC&q=Reference+of+jaunpore+in+european+books&dq=Reference+of+jaunpore+in+european+books&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjch-HDkbXbAhXMrY8KHeFoDCcQ6AEILzAB
5.https://books.google.co.in/books?id=tqEhAAAAMAAJ&q=Reference+of+jaunpore+in+european+books&dq=Reference+of+jaunpore+in+european+books&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjch-HDkbXbAhXMrY8KHeFoDCcQ6AEINzAD



RECENT POST

  • औषधीय गुणों के साथ रेशम उत्पादन में भी सहायक है, शहतूत की खेती
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     30-10-2020 04:16 PM


  • भारत में लौह-कार्य की उत्पत्ति
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     29-10-2020 05:43 PM


  • पंजा शरीफ में भी मौजूद है पैगंबर मुहम्मद साहब कदम
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     29-10-2020 09:50 AM


  • मोहम्‍मद के जन्‍मोत्‍सव मिलाद से जूड़े अध्‍याय
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     27-10-2020 09:59 PM


  • कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने में चुनौती साबित हो रहा है जल संकट
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     27-10-2020 12:32 AM


  • दशानन की खूबियां
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     26-10-2020 10:38 AM


  • आश्चर्य से भरपूर है, बस्तर की असामान्य चटनी छपराह
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     25-10-2020 05:59 AM


  • नृत्‍य में मुद्राओं की भूमिका
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     23-10-2020 08:17 PM


  • दिव्य गुणों और अनेकों विद्याओं के धनी हैं, महर्षि नारद
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     22-10-2020 04:58 PM


  • जौनपुर के मुख्य आस्था केंद्रों में से एक है, मां शीतला चौकिया धाम
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     21-10-2020 09:38 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id