कैसे हुई हमारी धरती की रचना?

जौनपुर

 04-06-2018 03:47 PM
शुरुआतः 4 अरब ईसापूर्व से 0.2 करोड ईसापूर्व तक

पृथ्वी का निर्माण एक अत्यंत रोचक और महत्वपूर्ण घटना थी जो कि इस ब्रह्माण्ड में जीव जीवन की शुरुआत के लिए जिम्मेदार थी। बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी एक समय आग का जलता हुआ गोला था जिस पर कई गैसों की अधिकता थी। इन्ही गैसों की अधिकता से पृथ्वी पर बड़ी मात्रा में रासयनिक अभिक्रियाएँ हुईं जिनके फलस्वरूप पृथ्वी पर अनेकों वर्षों तक वर्षा हुई। इस वर्षा के कारण पृथ्वी की उपरी सतह ठंडी हो गयी। इन्हीं रासायनिक अभिक्रियों का ही फल था कि पृथ्वी पर एक-कोशिकीय जीव का जन्म हुआ। अमीबा को एक-कोशिकीय जीव कहा जाता है। एक कोशीय-जीव के साथ ही शैवालों का भी जन्म पृथ्वी पर हुआ और यहीं से पृथ्वी पर जीव जगत की शुरुआत हुयी। प्रारंभ में पृथ्वी पर आज की तरह पेड़ पौधे भी नहीं पाए जाते थें परन्तु समय के साथ होने वाले अनवरत बदलाव का ही फल है कि यहाँ पर अस्थि वाले जीव, बहु कोशिकीय जीव व विशाल काय वृक्षों की स्थापना हुयी।

पृथ्वी पर पैदा होने वाले प्रथम जीव जलीय जीव थे जो कि समय के साथ-साथ और विकसित होते चले गए और पृथ्वी पर डायनासोर जैसे अति विशाल जीवों का उद्भव हुआ। जौनपुर के समीप ही सलखन से बड़ी मात्रा में डायनासोरों की अस्थियाँ व अंडे प्राप्त हुए हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि जौनपुर और उसके आस-पास के क्षेत्र में कभी डायनासोर टहला करते थे। पृथ्वी पर मानव संभवतः बहुत देर से प्रकाश में आया। अफ्रीका से मिले मानव साक्ष्य जैसे कि लूसी, रॉबडस्ट आदि मानव कंकाल मानव के विकास की क्रमिक प्रक्रिया को प्रदर्शित करते हैं। एक समय पृथ्वी दो ही भागों में विभाजित थी परन्तु पृथ्वी के अन्दर बनी प्लेटों में होने वाली अभूतपूर्व टक्कर के कारण यह अनेकों टुकड़ों में बंट गयी जिसे हम आज वर्तमान में देखते हैं। एक समय अफ्रीका मेडागास्कर आदि भारत से सटे हुए थे लेकिन प्लेटों के अन्दर होने वाली टक्करों के कारण ये दूर बह गए।

जौनपुर हिमालय की तलहटी से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह कथन महत्वपूर्ण इस लिए है क्यूंकि एक समय हिमालय के इसी क्षेत्र में एक महासागर हुआ करता था जिसका नाम टेथिस महासागर था। प्लेटों के अन्दर होने वाली इन्हीं टक्करों के कारण सागर के अन्दर की जमीन ऊपर उठने लगी और वहां पर हिमालय का निर्माण हुआ। आज भी हिमालय प्रतिवर्ष कुछ ऊंचा होते रहता है। इस प्रकार हम देख सकते हैं कि किस प्रकार से एक आग के गोले से होते हुए पृथ्वी आज के इस स्वरुप में पहुंची है। परन्तु यह स्वरुप भी तय नहीं है, यह भी समय के साथ-साथ बदल रहा है।

1. इंडिका प्रणय लाल
2. एवोल्यूशन ऑफ़ लाइफ। रंधावा



RECENT POST

  • जौनपुर शिल्प बाजार विकसित करने के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है, बनारसी रेशम उद्योग का इतिहास
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     07-12-2021 09:05 AM


  • उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतीक चिन्ह दो मछली कोरिया‚ जापान और चीन में भी है लोकप्रिय
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     06-12-2021 09:42 AM


  • स्वतंत्रता के बाद भारत छोड़कर जाने वाले ब्रिटिश सैनिकों की झलक पेश करते दुर्लभ वीडियो
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     05-12-2021 08:40 AM


  • भारत से जुड़ी हुई समुद्री लुटेरों की दास्तान
    समुद्र

     03-12-2021 07:46 PM


  • किसी भी भाषा में मुहावरें आमतौर पर जीवन के वास्तविक तथ्यों को साबित करती है
    ध्वनि 2- भाषायें

     03-12-2021 10:42 AM


  • नीलगाय की समस्या अब केवल भारतीय किसान की ही नहीं बल्कि उन देशों की भी जिन्होंने इसे आयात किया
    निवास स्थान

     02-12-2021 08:44 AM


  • भारत की तुलना में जर्मनी की वोटिंग प्रक्रिया है बेहद जटिल
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     01-12-2021 08:55 AM


  • हिन्दी शब्द चाँपो औपनिवेशिक युग में भारत से ही अंग्रेजी भाषा में Shampoo बना
    ध्वनि 2- भाषायें

     30-11-2021 10:23 AM


  • जौनपुर के शारकी राजवंश के ऐतिहासिक सिक्के
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     29-11-2021 08:50 AM


  • भारत ने मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता का खिताब छह बार अपने नाम किया, पहली बार 1966 में रीता फारिया ने
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     28-11-2021 12:59 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id