मंदिर-नगर और स्थलवृक्ष का सम्बन्ध

जौनपुर

 02-05-2018 02:28 PM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

भारत में प्राचीन काल से मंदिरों का बहुत बड़ा महत्व रहा है, आप भारत में किसी भी जगह जाएँ, आपको वहाँ पर एक ना एक मंदिर जरुर मिलेगा। ईश्वर की आराधना करने के लिए हम घर में भी पूजाघर बनाते हैं और भगवान की मूर्ति की स्थापना करते हैं तो हम मंदिर क्यों बनाते हैं? मंदिरों को हम इतना महत्व क्यों प्रदान करते हैं अगर हमारे सभी धर्म-ग्रन्थ और सिद्धपुरुष कह गए हैं कि इश्वर हर कण-कण में बसता है?

इंसान समाज के प्रति निष्ठा रखने वाला जीव है। स्वामी विवेकानंद के अनुसार मंदिर एक ऐसी जगह होती है जहाँ पर इंसान भीड़ में रहकर भी अकेले रह आत्मिक समाधान प्राप्त कर सकता है। प्राचीन काल से मंदिर एक ऐसी जगह है जहाँ पर सब लोग इकठ्ठा होकर धार्मिक-सामाजिक कार्य उत्सव आदि एक होकर मनाते हैं। पूजाघर आदि घर के लोगों तक सीमित रहता है लेकिन मंदिर सभी के लिए होता है तथा बड़े बड़े उत्सव जो बड़े पैमाने पर होते हैं उसके लिए मंदिरों की जरुरत होती है, इससे सामाजिक एकता एवं सलोखा जुड़ा रहता है। मंदिरों का दूसरा और महत्वपूर्ण कार्य जो प्राचीन समय से चला आ रहा है, वह है शिक्षा एवं जानकारी-समाचार-सूचना आदि का प्रसार। मंदिरों का स्थापत्य हमारे शास्त्र-ग्रंथों के अनुसार होता है, जिसके हिसाब से पूजाविधि, पूजा-उपचार आदि के साथ-साथ उपरोक्त दिए कारणों की भी सिद्धि हो। इसी वजह से बहुत से मंदिरों में गर्भ-गृह आदि के साथ ही सभा-मंडप, नृत्य/नाट्य/रंग मंडप रहते हैं। मंदिर हमेशा पानी के स्त्रोत के पास होता है तथा मंदिर में धर्म के चार पुरुषार्थ: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष तथा भगवान की जीवन कहानियाँ, उसके अनेक रूप और लोगों के रोज़-मर्रा के जिंदगी का भी चित्रण मिलता है।

जौनपुर का चौकिया धाम मंदिर अथवा करालबीर मंदिर, इन दोनों मंदिरों के अपने स्थलवृक्ष हैं।

हमारे धर्म में वृक्षों का अनन्यसाधारण महत्व है जिस वजह से हर मंदिर में भी पेड़ रहते हैं, बहुतायता से भगवान की मूर्तियों की स्थापना पेड़ के नीचे की जाती है, खास कर जब वहाँ कोई मंदिर न हो अथवा छोटा सा मंदिर बनाना हो। कभी-कभी किसी पेड़ के नीचे अथवा किसी वाटिका/उपवन के अन्दर मूर्तियाँ मिलती हैं। हर भगवान के कुछ प्रिय पेड़-पौधे रहते हैं और क्योंकि वे कभी-कभी जिस पेड़ के नीचे अथवा प्रकार के उपवन में मिले हैं तब उनके मंदिर में आप उस वृक्ष अथवा पौधों को पाते हैं। इनका बहुत खयाल रखा जाता है क्योंकि वे पवित्र और भगवान को प्रिय माने जाते हैं। स्थलपुराण नामक प्राचीन ग्रन्थ में इस बारे में लिखा गया है, ऐसे वृक्षों को स्थल-वृक्ष कहते हैं, बहुत से प्राचीन शहरों का, मंदिरों का नाम उनके स्थल-वृक्ष के नाम से रखा गया है।

1. आलयम: द हिन्दू टेम्पल एन एपिटोम ऑफ़ हिन्दू कल्चर- जी वेंकटरमण रेड्डी
2. http://www.thehindu.com/books/trees-and-temples/article5026047.ece



RECENT POST

  • खाद्य यादों में सभी पांच इंद्रियां शामिल होती हैं, इस स्मृति को बनाती समृद्ध
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     26-05-2022 08:17 AM


  • जौनपुर सहित यूपी के 6 जिलों से गुज़रती पवित्र सई नदी, क्यों कर रही अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष?
    नदियाँ

     25-05-2022 08:18 AM


  • जंगलों की मिटटी में मौजूद 500 मिलियन वर्ष पुरानी विस्तृत कवक जड़ प्रणालि, वुड वाइड वेब
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     24-05-2022 07:38 AM


  • चंदा मामा दूर के पे होने लगी खनिज संसाधनों के लिए देशों के बीच जोखिम भरी प्रतिस्पर्धा
    खनिज

     23-05-2022 08:47 AM


  • दुनिया का सबसे तेजी से उड़ने वाला बाज है पेरेग्रीन फाल्कन
    व्यवहारिक

     22-05-2022 03:53 PM


  • क्या गणित से डर का कारण अंक नहीं शब्द हैं?भाषा के ज्ञान का आभाव गणित की सुंदरता को धुंधलाता है
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-05-2022 11:05 AM


  • भारतीय जैविक कृषि से प्रेरित, अमरीका में विकसित हुआ लुई ब्रोमफील्ड का मालाबार फार्म
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 09:57 AM


  • क्या शहरों की वृद्धि से देश के आर्थिक विकास में भी वृद्धि होती है?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:49 AM


  • मिट्टी से जुड़ी हैं, भारतीय संस्कृति की जड़ें, क्या संदर्भित करते हैं मिट्टी के बर्तन या कुंभ?
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:49 AM


  • भगवान बुद्ध के जीवन की कथाएँ, सांसारिक दुःख से मुक्ति के लिए चार आर्य सत्य
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:53 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id