शाहनामा हस्तलिपि की रहस्यमय तारीख

जौनपुर

 26-04-2018 09:45 AM
मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

सन 1300 और 1600 के बीच, फारसी चित्रकारी शैलियों का भारत में सल्तनत और मुगल राज के साथ-साथ हिंदू चित्रकला शैलियों पर लगातार प्रभाव पड़ा। इसके विषय की जानकारी विभिन्न स्थानों से हमें हो जाती है। 14 वीं शताब्दी में शाह-नामा का एक संस्करण भारत में बनाया गया था, और 14 वीं शताब्दी में जैन पांडुलिपियों में फारसी मूल के लिए शाही आकृति का प्रयोग देखने को मिलता है। 15 वीं और 16 वीं शताब्दी की शुरुआत में, सल्तनत चित्रकारी से जुड़े कई दस्तावेज़ उपलब्ध हैं जो भारतीय और फारसी चित्रकारी के मिश्रण को प्रस्तुत करता है। 16 वीं शताब्दी के आखिरी साठ वर्षों के दौरान, फ़ारसी कलाकार, प्रकाशक और लेखक फारस में राजनैतिक परिवर्तन और उठा पटक के कारण भारत पहुंचे थे। इस अवधि में बड़े पैमाने पर चित्रों और लेखों का उद्भव हुआ। उन्ही लेखों में से एक लेख है शाहनामा। जौनपुर इतिहास के विभिन्न पड़ावों पर खरा उतरता है।

यहाँ पर कई पुस्तकों हस्तलिपियों को लिखा गया था जैसा कि जैनियों की प्रमुख हस्तलिपि कल्पसूत्र और शाहनामा। यह हस्तलिपि 1501 में लिखी गई थी और अब यह न्यू यॉर्क के पब्लिक पुस्तकालय में है। ईरान के राजाओं के इतिहास का शाहनामा फेर्दोसी द्वारा 10 वी सदी में लिखा गया था। यह किताब फ़ारसी भाषा में लिखी गई थी और मुग़ल महाराजाओं की पसंदीदा किताब हुआ करती थी; मुग़ल बादशाह इस किताब को पढ़कर ईरान से प्रेरणा लेते थे। भारत के संग्रहालयों में बहुत सी शाहनामा की हस्तलिपियां हैं जो कि मुग़ल सम्राटों की हुआ करती थी। इनमें से सबसे पुरानी हस्तलिपि जौनपुर की है और इसे 1501 में लिखा गया था, अब यह न्यू यॉर्क के पुस्तकालय में मौजूद है।

1300 से 1600 के बीच फ़ारसी चित्रकला ने भारतीय चित्रकला को काफ़ी प्रभावित किया था। यह सभी चित्र मुग़ल दरबार और बड़े-बड़े राजघरानो में लगाए जाते थे। 14 वी सदी तक यह संभावनाए थीं कि छोटे शाहनामा भारतीय उत्पत्ति के थे और जैन हस्तलिपि से ही फ़ारसी हस्तलिपि की शुरुवात हुई थी। यहाँ पर सल्तनत की हस्तलिपियों के साथ छेड़छाड़ की भी परेशानी उत्पन्न हुई थी। तारीख या चित्र में थोड़े बदलाव कर देने से एक अलग ही मंद उत्पादन तैयार होता था जिससे कि एक अहम् और नयी सल्तनत हस्तलिपि बनाई जा सके। कुछ प्राचीन काल में प्रयोग होने वाली हस्तलिपियां हाल ही में खोजी गई हैं, उदहारण के लिए – जौनपुर में लिखा गया फेर्दोसियों का शाहनामा। इसके लिखे जाने की तारीख से छेड़छाड़ हुई थी , क्योंकि इसमें जौनपुर के प्रति अन्त्यानुप्रासवाले शब्द थे जो कि मुग़ल काल के पहले नहीं हुआ करते थे। और इस हस्तलिपि में सभी चित्र या व्यक्ति पगड़ी पहने हुए देखे जा सकते थे, यह बादशाह हुमायूँ के काल के दौरान हुआ करता था। सारे अक्षर काफी पुराने हैं लेकिन छोटे-छोटे चित्रों में नए समय की मिलावट देखी जा सकती है। इस प्रकार से हम पाते हैं कि जौनपुर उस समय में कितना उत्कृष्ट था।

1.http://www/iranicaonline.org/articles/india-xx-persian-influences-on-indian-painting
2.https://digitalcollections.nypl.org/collections/shhnmah#/?tab=about



RECENT POST

  • शर्की सल्तनत के समय में जौनपुर और ज़फ़राबाद की शिक्षा प्रणाली और विद्वान
    मघ्यकाल के पहले : 1000 ईस्वी से 1450 ईस्वी तक

     22-04-2019 07:39 AM


  • ईस्टर (Easter) के दिन ईश्वर को समर्पित संगीत
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     20-04-2019 06:32 PM


  • क्या सच में अकबर द्वारा सुनाई गयी थी जौनपुर के काजी को मौत की सजा?
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     20-04-2019 10:00 AM


  • क्यों मनाया जाता है ईसाई त्यौहार ईस्टर (Easter)?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     19-04-2019 09:29 AM


  • श्रमण परंपरा: बौद्ध और जैन धर्म में समानताएं और मतभेद
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-04-2019 11:08 AM


  • जौनपुर का काजी और जुम्मन की मनोरंजक लोककथा
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-04-2019 12:27 PM


  • जाने सल्तनत काल में किस प्रकार संगठित की जाती थी जौनपुर सरकार
    मघ्यकाल के पहले : 1000 ईस्वी से 1450 ईस्वी तक

     16-04-2019 04:08 PM


  • शास्त्रीय संगीत जगत में ख्‍याल शैली का विकास
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     15-04-2019 02:09 PM


  • मुस्लिम समुदाय के बुनियादी मूल्यों को व्यक्त करता त्यौहार, ईद-उल-फित्तर
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-04-2019 07:30 AM


  • थाईलैंड में अयुत्या (Ayutthaya) और भारत में अयोध्या
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     13-04-2019 07:15 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.