हम अपने से बड़ों के चरण क्यूँ छूते हैं ?

जौनपुर

 08-04-2018 10:15 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

हम सभी को अपने माता-पिता, बड़ों, शिक्षकों और महान आत्माओं के आगे झुककर पैर छूने की शिक्षा दी जाती है। बदले में वे अपना हाथ हमारे ऊपर रखकर आशीर्वाद देते हैं। पैर छूना एक दैनिक प्रक्रिया है जैसे कि एक नए कार्य की शुरुआत में, जन्मदिन, त्यौहार आदि शुभ अवसर पर, आशिर्वाद एक अभिवादन के साथ किया जाता है जो कि स्वयं को, एक परिवार को और एक सामाजिक ढांचे को दर्शाता है। पैर छूना एक सम्मान है जो कि हम अपने से बड़े उम्र के परिपक्व और दिव्य बुजुर्गों को व्यक्त करते हैं।

यह एक तरह का प्रतीक है जो, हमारे वरिष्ठ जन जिन्होंने अपने निस्वार्थ प्रेम और हमारे कल्याण के लिए त्याग किए हैं उनके प्रति हमारा सम्मान दर्शाता है। यह नम्रता से दूसरे की महानता को स्वीकार करने का एक तरीका है। यह परंपरा प्रतिबिंबित करती है एक मजबूत पारिवारिक संबंध, जो भारत की स्थायी शक्तियों में से एक रही है। प्यार, देवत्व और बड़प्पन से भरे दिल से शुभकामनाएं एक महत्वपूर्ण सन्देश है जो कि इस प्रकार से प्रदर्शित की जाती है। यह प्रक्रिया हमें शक्ति देने का कार्य करती है तथा बुजुर्गों के आशीर्वाद से एक सकारात्मक उर्जा का संचार हमारे अन्दर होता है।

सम्मान दिखाने के विभिन्न रूप हैं:
प्रथुथन - किसी व्यक्ति का स्वागत करने के लिए।
नमस्कार - नमस्कार के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए।
उपसंग्रहण - बड़ों या शिक्षकों के पैर छूने के लिए।
शाष्टांग- पेट के बल लेट कर आशीर्वाद लेना।
प्रत्याबिवादन - शुभकामना प्रदान करना।

इन नियमों को हमारे शास्त्रों में निर्धारित किया गया है कि किसके लिए झुकना चाहिए। महाभारत में इस पहलू को उजागर करने वाली कई कहानियां हैं जो कि पैर छूने के इस महत्व को दर्शाती हैं।

1. इन इंडियन कल्चर व्हाई डू वी... – स्वामिनी विमलानान्दा, राधिका कृष्णकुमार



RECENT POST

  • छोटा लाल फल, जिसने बदल दिया भारतीय रसोई का स्वाद
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     25-09-2020 03:32 AM


  • महारानी जिन्दन की दिलचस्प कहानी
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     24-09-2020 03:20 AM


  • भारत में दास के रूप में पहुंचे और शासकों के रूप में उभरे अफ्रीकियों की कहानी भुला दी गई
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     23-09-2020 03:33 AM


  • इस्लामिक वास्तुकला के विशिष्ट उदाहरणों में से एक है, जौनपुर की खालिस मुखलिस मस्जिद
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-09-2020 10:51 AM


  • भारतीय शिल्प निर्माण का अनूठा उत्पाद हैं, काली मिट्टी के बर्तन
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     21-09-2020 04:16 AM


  • ऐतिहासिक एलिफेंटा गुफाएं
    खदान

     20-09-2020 08:23 AM


  • व्यक्ति के बारे में कई जानकारियां हासिल कर पाने में सक्षम है, डीएनए परीक्षण (DNA Test)
    डीएनए

     19-09-2020 01:10 AM


  • बैटरियों का बैंक क्या है? क्या यहां वास्‍तव में बैटरियां मिलती है?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-09-2020 02:29 AM


  • प्राचीन युद्धों के मुख्य किरदार और चतुरंग सेना के मुख्य खंड: हाथी
    हथियार व खिलौने

     17-09-2020 06:07 AM


  • खयाल गायकी
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     16-09-2020 02:18 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id