जौनपुर के भवनों पर मेसन निशान

जौनपुर

 20-03-2018 11:18 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

जौनपुर वास्तु के दृष्टिकोण से एक अत्यंत महत्वपूर्ण जिला है। यहाँ पर बड़े पैमाने पर भवनों आदि का निर्माण किया गया है। यहाँ के भवनों पर कुछ विभिन्न प्रकार के निशान पाए जाते हैं जिससे भवन बनाने वाले लोगों के समुदाय का पता चलता है। किले के प्रमुख द्वार पर भी एक मछाली का निशान बनाया गया है जिससे इसपर कार्य करने वाले समुदाय के विषय में जानकारी प्राप्त होती है। अब यह जानना जरूरी है कि ये मेसन (Mason) निशान हैं क्या? इन निशानों की अवधारणा कई जगहों पर अलग है। ऑक्सफ़ोर्ड लिविंग डिक्शनरी के अनुसार "यह एक विशिष्ट कलाकृति है जो पत्थर पर एक समुदाय द्वारा बनायी जाती है"। अब बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न हमारे मन में आता है- वे किस प्रकार के निशान हैं और उनके अंकन का क्या मतलब है? इन बिंदुओं पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है कि किस प्रकार से पत्थरों की पहचान और उनके उत्खनन स्थान आदि की जानकारी व इनका निर्माण करने वाले समुदाय की जानकारी एक निशान से प्राप्त हो जाती है।

मेसन के निशान की अवधारणा कई जगहों में अलग है लेकिन हम मेसन को दो मुख्य समूहों में विभाजित कर सकते हैं, प्रथम जो कि खदानों पर काम करते हैं और दूसरे जो इमारत पर काम करते हैं। कुछ बड़े भवन परियोजनाओं में पत्थरों की आपूर्ति करने के लिए बड़ी संख्या में पत्थर सामग्री और कई खदानों की आवश्यकता होती है। मुख्य रूप से पत्थरों को काटना व इनको एक आकर में लाना खदान के पास ही होता था। तराशे हुए पत्थरों को बाद में एक विशेष चिह्न के साथ चिह्नित कर दिया जाता था जो कि यह संकेत देता था कि इनको किस स्थान पर लगाया जायेगा। बनाये गए निशानों में सबसे अधिक निशान खदानों के निशान पर आधारित होते थे। खदान का भुगतान तराशे हुए पत्थर के टुकड़ों की मात्रा पर आधारित था। निशानों में कहीं कहीं पर मछली का निशान बनाया जाता था जो की मछुआरों के समुदाय को प्रदर्शित करता है, कहीं कहीं पर तीर धनुष के निशान को बनाया जाता था जो कि बहेलियों के समुदाय का परिचायक था।

बड़ी इमारत मात्र एक समुदाय के लोग नहीं बना सकते थे इसलिए पूरी ईमारत को कई भागों में बाँट दिया जाता था जिसपर अलग-अलग समुदाय के लोग कार्य करते थे। इन निशानों के आधार पर ही यह पता चलता है कौन से समुदाय ने कौन सी दीवार का निर्माण किया है। जौनपुर के जामी मस्जिद, अटाला, लाल दरवाजा, शाही किला आदि पर ये निशान आराम से दिखाई दे जाते हैं।

प्रथम चित्र: शाही किले की दीवार पर बना मछली के आकार का मेसन निशान।
द्वितीय चित्र: लाल दरवाज़ा मस्जिद की दीवार पर बना मोर के आकार का मेसन निशान।

1. http://www.markmastermasons.org.uk/Downloads/Mark-Masonry.pdf
2. द आर्किटेक्चर एंड द हिस्ट्री ऑफ़ रामनगर फोर्ट विथ अ स्पेशल रिफरेन्स ऑफ़ मेसन मार्क, शिवम् दुबे (बी.एच.यू. 2016)



RECENT POST

  • जौनपुर में शहरी विकास का ग्रामीण विकास पर पड़ता प्रभाव
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     22-08-2019 02:12 PM


  • कैसे विज्ञापन पसन्द करते हैं जौनपुर के उपभोक्ता
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     21-08-2019 04:14 PM


  • जौनपुर की प्रसिद्ध मूली – जौनपुरी नेवार
    साग-सब्जियाँ

     20-08-2019 01:24 PM


  • लहसुन के चमत्कारी औषधीय गुण
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     19-08-2019 02:00 PM


  • कहाँ और कैसे किया जाता है भारतीय मुद्रा का मुद्रण(Printing)
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     18-08-2019 10:30 AM


  • नदियों का संगम क्या है और त्रिवेणी संगम कैसे खास है?
    नदियाँ

     17-08-2019 01:49 PM


  • विभाजन के बाद भारत पाक के मध्‍य संपत्ति विवाद
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     16-08-2019 03:47 PM


  • अगस्त 1942 में गोवालिया टैंक मैदान में लोगों पर इस्तेमाल की गई आंसू गैस की अनदेखी तस्वीरें
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     15-08-2019 08:36 AM


  • विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न रूप से मनाया जाता है रक्षाबंधन
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-08-2019 02:58 PM


  • जौनपुर में रोजगार सृजन कार्यक्रम का क्रियान्वयन
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     13-08-2019 12:17 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.