जौनपुर के प्रमुख तालाब और राजा तालाब

जौनपुर

 10-03-2018 09:25 AM
नदियाँ

पानी की आवश्यकता मानव जीवन की समस्त आवश्यकताओं में सबसे महत्वपूर्ण है यही कारण है की दुनिया भर की सभी मुख्य सभ्यताएं नदियों या जल श्रोतों के किनारे ही बसी हुयी हैं। जौनपुर शहर गोमती नदी के किनारे बसा हुआ है, यहाँ पर कई तालाब व पोखरे बनाये गए हैं जो जल की व्यवस्था को बरक़रार रखने में व कृषि कार्य में मददगार साबित हुए हैं। वर्तमानकाल में जौनपुर में कुल 647 निजी तालाब हैं और 3585 तालाब उपस्थित हैं जो यहाँ के तालाबों की परंपरा को प्रदर्शित करते हैं। जौनपुर शहर में स्थित राजा तालाब 19विं शताब्दी में बनवाया गया था यह तालाब प्राचीन तालाबों के आधार पर ही बनाया गया है जिसमे सीढियां व एक सपाट रास्ता बनाया गया है। सपाट रास्ता हाथियों व घोड़ों को पानी पीने के लिए बनाया गया था। तालाब के किनारे पर वस्त्र बदलने के स्थान भी बनवाये गए हैं। तालाब में वर्षा में जल भरने के लिए विभिन्न नालियों का इंतज़ाम किया गया था वर्तमान काल में तालाब के किनारे का वट वृक्ष के बगल में ही एक नाली दिखाई दे जाती है। तालाब में जल की स्थिति नापने के लिए एक स्तम्भ भी लगाया गया है जो की यहाँ के जल की स्थिति बताता है। जौनपुर शहर में चौकिया मंदिर में भी ऐसे ही तालाब का निर्माण किया गया है। महाराजगंज थाना क्षेत्र में लोहिंदा चौराहे के समीप भी एक हवेली के पास भी ऐसे ही एक और तालाब का निर्माण किया गया है।

जौनपुर में तालाब बनाने वाले लोगों को पालीवाल कहा जाता है पालीवाल ब्राह्मण थे। जैसलमेर, जोधपुर के पास दसवीं सदी में पल्ली नगर में बसने के कारण ये पल्लीवाल या पालीवाल कहलाए। इन ब्राह्मणों को मरुभूमि में बरसने वाले थोड़े- से पानी को पूरी तरह से रोक लेने का अच्छा कौशल सध गया था। वे खडीन के अच्छे निर्माता थे। मरुभूमि का कोई ऐसा बड़ा टुकड़ा जहां पानी बहकर आता हो, वहां दो या तीन तरफ से मेड़बंदी कर पानी रोक कर विशिष्ट ढंग से तैयार बांधनुमा खेत को खडीन कहा जाता है। खडीन खेत बाद में है, पहले तो तालाब ही है। मरुभूमि में सैकड़ों मन अनाज इन्हीं खडीनों में पैदा किया जाता रहा है। आज भी जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर क्षेत्र में सैकड़ों खडीन खड़ी हैं। लेकिन पानी के काम के अलावा स्वाभिमान भी क्या होता है, इसे पालीवाल ही जानते थे। जैसलमेर में न जाने कितने गांव पालीवालों के थे। राजा से किसी समय विवाद हुआ। बस, रातों-रात पालीवालों के गांव खाली हो गए। एक से एक कीमती, सुन्दर घर, कुएं खडीन सब छोड़कर पालीवाल राज्य से बाहर हो गए। पालीवाल वहां से निकलकर कहां-कहां गए इसका ठीक अंदाज नहीं है पर एक मुख्य धारा आगरा और जौनपुर में जा बसी थी।

इस से यह तथ्य सिद्ध होता है की जौनपुर में पालीवाल लोग आये थे और उन्होंने यहाँ पर अवश्य कई तालाबों आदि का निर्माण किया।

1.आज भी खरे हैं तालाब, अनुपम मिश्र
2.सी डी आई प जौनपुर



RECENT POST

  • भारत ने मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता का खिताब छह बार अपने नाम किया, पहली बार 1966 में रीता फारिया ने
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     28-11-2021 12:59 PM


  • भारतीय परिवार संरचना के लाभ
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     27-11-2021 10:23 AM


  • विश्व सहित भारत में आइस हॉकी का इतिहास
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     26-11-2021 10:13 AM


  • प्राचीन भारत में भूगोल की समझ तथा भौगोलिक जानकारी के मूल्यवान स्रोत
    ठहरावः 2000 ईसापूर्व से 600 ईसापूर्व तक

     25-11-2021 09:43 AM


  • सई नदी बेसिन में प्राचीन पुरातत्व स्थल उल्लेखनीय हैं
    छोटे राज्य 300 ईस्वी से 1000 ईस्वी तक

     24-11-2021 08:45 AM


  • मशक से लेकर होल्‍डॉल और वाटरप्रूफ़ बैग तक, भारत में स्वदेशी निर्माण का इतिहास
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     23-11-2021 10:58 AM


  • जौनपुर के क्रांतिकारी शायर सैय्यद अहमद मुज्तबा उर्फ़ वामिक़ जौनपुरी की बेहतरीन रचनाएं
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     22-11-2021 10:19 AM


  • दुनिया के सबसे महंगे फव्वारों में से एक है, ग्रैंड कैस्केड
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     21-11-2021 11:01 AM


  • वैज्ञानिक रूप से सटीक, लेकिन कलात्मक घटक से पौधे के रूप, रंग, विवरण को चित्रित करता है वानस्पतिक चित्रण
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     20-11-2021 11:14 AM


  • सिख समाज में अखंड पाठ की गौरव गाथा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     19-11-2021 09:42 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id