जौनपुर की 3000 साल पुरानी सभ्यता

जौनपुर

 03-02-2018 10:56 AM
ठहरावः 2000 ईसापूर्व से 600 ईसापूर्व तक

जौनपुर का नाम आते ही दिमाग में शर्की सल्तनत का नाम आता है परन्तु शर्की सल्तनत से पहले जौनपुर में क्या था? क्या ये बिल्कुल विरान था? यह जानने के लिये हमें इतिहास और पुरातत्व की मदद लेनी पड़ेगी। किसी भी स्थान के इतिहास को मुख्यतया दो भागों में विभाजित कर के देखा जा सकता है 1- प्रागैतिहासिक इतिहास 2- लिखित इतिहास। प्रागैतिहासिक इतिहास का सन्दर्भ ये है की जब लेखन कला का उदय ना हुआ था तथा व्यक्ति यायावर जीवन व्यतीत करता था। भारत के सन्दर्भ मे सिन्धु सभ्यता के समय व्यक्ति शहरों मे रहना शुरू कर दिया था परन्तु वहाँ की भाषा को अभी तक ना पढे जाने कि वजह से सिन्धु सभ्यता को एक तीसरे इतिहास के खण्ड मे रखा गया है जिसे (प्रोटो-हिस्ट्री) कहते हैं। लिखित इतिहास का कालखण्ड लिखित इतिहास के शुरू होने पर होती है, जिसमे हमें लिखित ऐतिहासिक साक्ष्यों का पता किसी अभिलेख, पाण्डुलिपि, सिक्के, ताडपत्र या ताम्रपत्र से चलता है। मौर्य काल के समय से हमें लिखित पट्टियाँ मिलनी शुरु हो जाती हैं इसके पहले भारतभर में कहानी की तरह सब विभिन्न ग्रंथों का उच्चारण करते थें और बाद में जाकर उनको विभिन्न स्थानों पर उतारा गया था। जौनपुर के इतिहास को भी इन्ही प्रकार के दो भागों में बाँट के देखा जा सकता है, जैसे की विभिन्न खुदाइयों के अवशेषों के आधार पर हम जौनपुर के प्रागैतिहासिक बसाव की सीमा का अवलोकन कर सकते हैं, विभिन्न तथ्यों व उत्खननों के आधार पर यहाँ की प्राचीनता की सीमा करीब 3000 ई. पू. माना जा सकता है। यहाँ पर कुछ प्रमुख खुदाइयाँ बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ने करवाया था तथा कुछ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने करवाया था। चित्र में जौनपुर के शाही किला के उत्खनन को प्रदर्शित किया गया है तथा खुदाई से निकले प्राचीन भवन साक्ष्यों को प्रदर्शित किया गया है। बलुआघाट, मादरडीह आदि वे स्थान हैं जहाँ से जौनपुर के प्राचीनता के अवशेष प्राप्त होता है। यहाँ से कृष्ण लेपित मृदभाण्ड की भी प्राप्ति हुयी है जो अपने में अति विशिष्ट बर्तन माने जाते हैं। जौनपुर बौद्ध काल में भी अत्यन्त महत्वपूर्ण था और यह कहना कतिपय गलत नही होगा कि महात्मा बुद्ध कौसाम्बी जाते हुये यहीं से होते हुये गये थें। मछलीशहर प्राचीन नाम (मश्चिका संड) था जिसे बौद्ध कालीन माना जाता है। बौद्ध काल के बाद कुषाण, गुप्त काल के भी अवशेष जौनपुर से प्राप्त होते हैं। जौनपुर में बड़ी संख्या में मंदिर व मूर्तियाँ प्रतिहार काल के शासन में आने के बाद बनाई गयी थी जिसका प्रमाण यहाँ के विभिन्न पुरातात्विक सर्वेक्षणों से प्राप्त हो जाता है। यहाँ पर असंख्य मूर्तियाँ उस काल की मिलती हैं। प्रतिहारों के काल के बाद जौनपुर में तुगलकों का और फिर शर्कियों का काल आया। उपरोक्त तथ्यों से जौनपुर की सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश पड़ता है। 1-मदारडीह उत्खनन रिपोर्ट पुरातत्त्व 2013, जौनपुर उत्खनन, अर्णव 2-http://vle.du.ac.in/mod/book/print.php?id=11071&chapterid=20385



RECENT POST

  • बिजली उत्पादन में कोयले और थर्मल पावर प्लांट की भूमिका
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-01-2019 12:38 PM


  • भूकंप की स्थिति में क्या होनी चाहिए हमारी प्रतिक्रिया?
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     17-01-2019 01:53 PM


  • थ्री-डी प्रिण्टिंग का तकनीक जगत में विकास
    संचार एवं संचार यन्त्र

     16-01-2019 12:14 PM


  • दस्तावेजों को संरक्षित करने के लिए “डिजिलॉकर एप”
    संचार एवं संचार यन्त्र

     15-01-2019 12:06 PM


  • भारत के विभिन्‍न राज्‍यों में मकर संक्रांति के अलग अलग रंग
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-01-2019 11:43 AM


  • मस्तक नहीं झुकेगा
    ध्वनि 2- भाषायें

     13-01-2019 10:00 AM


  • कलम या पेन का सुहाना सफर
    वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     12-01-2019 10:00 AM


  • बेहतर करियर का एक अच्‍छा विकल्‍प इवेंट मैनेजमेंट
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     11-01-2019 12:00 PM


  • क्या है आयकर तथा किसे और क्यों करना चाहिए इसका भुगतान
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     10-01-2019 11:31 AM


  • ऑनलाइन पैसा भेजने से पहले जान लें क्या है RTGS, NEFT और IMPS
    संचार एवं संचार यन्त्र

     09-01-2019 12:50 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.